भूत का स्रोत, वर्तमान का साक्षी,
भविष्य का नेतृत्वकर्ता हूँ,
मैं युवा हूँ,
कुछ दिन पहले ही तो पैदा हुआ हूँ।।
बदल जाऊँ तो प्राण हूँ, देश की साँस हूँ,
दूषित हो जाऊँ, तो देश का विनाश हूँ।
मैं ऊर्जावान युवा हूँ,
कुछ दिन पहले ही तो पैदा हुआ हूँ।।
पहले पढ़ूँ, उन क्रांतिकारियों का खत,
जब लिखूँ प्रेम का पत्र, न हो कुछ गलत,
क्योंकि मैं क्रांतिकारी युवा हूँ,
कुछ दिन पहले ही तो पैदा हुआ हूँ।।
मैं न जाति हूँ, न धर्म, राष्ट्र का भविष्य हूँ,
राष्ट्र की बुनियाद में, मैं ही दफ़न हूँ,
मैं एक जिम्मेदार युवा हूँ,
कुछ दिन पहले ही तो पैदा हुआ हूँ।।
आभार!
मनोज मानव की कलम से…
