About

Hi! I am Manoj Manav

जीवन परिचय

मनोज मानव, (जन्मः 07 अक्टूबर 1986) एक मानवतावादी चिंतक, कवि, व्याख्याता और राजनीतिज्ञ विष्लेशक एवं बहुजन सेवक संघ (ठैै) के राश्ट्रीय संयोजक भी हैं। जिनकी मूल पहचान जाति विरोधी सामाजिक चिंतक व विचारक एवं सामाजिक न्याय पर आधारित कवि की है। उत्तर प्रदेष जैसे राज्य में दलित, आदिवासी व पिछड़े वर्गों के बीच जाति व जाति के आधार पर भेदभाव व कुरीतियों के खिलाफ जन-जन के बीच मानवतावादी अभियान चलाने, सामाजिक व राजनैतिक चेतना जागृत करने, संवैधानिक हक-अधिकार के लिए लड़ाई लड़ने एवं कविता आदि के माध्यम से आवाज उठाने एवं जाति व्यवस्था को जड़ से मिटाने के लिए किये जा रहे उत्कृश्ट कार्य व प्रयास इन्हें विषेश पहचान दिलाते हैं।
मनोज मानव का जन्म, 07 अक्टुबर 1986 को उत्तर प्रदेष के अन्तर्राश्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्थल तथातग बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली, कुषीनगर से 8 किमी0 दूर पडरौना-कसया मार्ग के मध्य साखोपार से 2 किमी0 पूर्व जिगना गांव के एक अत्यन्त निर्धन परिवार में हुआ था। जहां उनके पिता श्री रामअधार कुषवाहा जी की एक साधारण किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनैतिक व्यक्ति के रूप में महत्वपूर्ण पहचान हैं। जो कि निरंतर दबे-कुचले लोगों के साथ धार्मिक व जातीय आधारों पर हो रहे भेदभाव के खिलाफ क्षेत्र में उनके साथ खड़े रहकर, हक-अधिकार दिलाने एवं वंचित लोगों को समाज के मुख्य धारा में लाने के लिए उत्कृश्ट कार्य कर रहे हैं।
मनोज मानव की जीवनसंगिनी संजू कुषवाहा हैं, जिनसे एक पुत्र उज्जवल प्रभात एवं पुत्री सर्वप्रिया है। मनोज मानव ने प्रारम्भिक षिक्षा दीनदयाल उपाध्याय वि0वि0 गोरखपुर के अधीन उदित नरायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पडरौना, कुषीनगर, उत्तर प्रदेष एवं डा0 भीमराव वि0वि0, आगरा एवं डा0 राम मनोहर लोहिया वि0वि0, फैजाबाद से प्राप्त की। स्नातक षिक्षा के दौरान ही पिता की ईच्छा थी कि प्रयागराज में रहकर सिविल सेवा की तैयारी करें, लेकिन प्रयागराज से वापस आकर वे मानवतावादी अभियानों से जुडे़ और पूर्वांचल स्तर पर मलिन बस्तियों, छोपड़पट्टीयों व गावों, विद्यालयों में जाकर बच्चों, छात्रों व छात्राओं के बीच जातीय भेदभाव, अन्धविष्वास, सम्प्रदायवाद एवं धार्मिक रूढ़ियों के खिलाफ जन-जागरण का अभियान चलाया।
जिन्होंने अपना सामाजिक करियर एक स्वैच्छिक संगठन के माध्यम से षुरू किया, और वर्तमान में ज्वलंत सामाजिक व राजनैतिक मुद्दों पर कविता, लेख के माध्यम से सक्रिय हैं एवं सामाजिक न्याय की कविताओं के माध्यम से लेखनी आम जन तक पहुचाया है, जिनसे लाखों लोगों को प्रेरणा मिलती है। मनोज मानव की कविताऐं एवं लेख समाचार पत्रों, पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाषित होते रहते हैं। इसके साथ ही दलित-पिछड़े व आदिवासी समाज के लोगों के साथ हो रहे अत्याचार व भेदभाव पर सरकार व प्रषासन से न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं तथा एक बेहतरीन बैडमिंटन खिलाड़ी भी हैं।

अपने मानवतावादी, सामाजिक कार्यों से स्वयं पहचान बनाने के पष्चात् भारत सरकार में वर्तमान में से0नि0 आई0ए0एस0 अधिकारी, श्री हरीष चन्द्र के साथ सामाजिक व राजनैतिक गतिविधियों में लगभग 3 वर्श से अधिक समय तक साथ काम किये और महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका निभाई।
जिसके पष्चात उन्हें उत्तर प्रदेष के कद्दावर मंत्री, श्री स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ 8 वर्श से अधिक समय तक दिन-रात पूरे प्रदेष में जनता के बीच कार्य कर दायित्वों का सफलता पूर्वक निर्वहन किया। जिसके दौरान उन्होंने जातीय भेदभाव, धर्मषास्त्रों के आधार पर भेदभाव एवं पिछड़े वर्गो की जातियों से जुड़े लोगों के इतिहास एवं भारत के उन महान बौद्ध धम्म के पद्चिन्हों पर चलने वाले राजाओं व महापुरूशों पर गहन अध्ययन करके अपने विचार दिये तथा एक सहयोगी की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।
वर्तमान में बहुजन सेवक संघ के माध्यम से पूरे भारत में दलित, आदिवासी एवं पिछड़े वर्गों से जुड़े लोगों को बहुजन महापुरूशों के विचारों से जोड़कर, इन्हें सामाजिक प्रतिश्ठा, राजनैतिक पहचान दिलानें एवं आर्थिक रूप से सषक्त करने के लिए कार्य कर रहे हैं।
मनोज मानव को मानवतावादी विचारक एवं कवि के रूप में उत्तर प्रदेष में एक विषेश पहचान है, इनकी कविता ‘‘मैं युवा हॅू‘‘, ‘‘देष जल रहा है‘‘, ‘‘रहने लायक देष बनाये‘‘, ‘‘अपनी आंधी खड़ी करो‘‘ आदि कविता की समाज के बीच अच्छी पहचान है। जो कि नियमित रूप से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाषित होती रहती हैं।

इलॅक्ट्रॉनिक मेल हेतु

अधिक जानकारी एवं विशेष कार्य के लिए संपर्क करे

Email
The form has been submitted successfully!
There has been some error while submitting the form. Please verify all form fields again.

Frequently Asked Questions